Gold-Silver Price: बीते कुछ समय से कीमती धातुओं यानी सोने-चांदी की काफ़ी चर्चा हो रही है। और इनके पीछे का मुख्य कारण इनकी क़ीमतों में बड़ी तेजी रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं की इनकी कीमतों के तेजी से बढ़ने और घटने के पीछे का मुख्य कारण क्या है, चलिए जानते हैं…
दरअसल, सोना और चांदी की कीमतें वैश्विक और घरेलू कारकों से प्रभावित होकर उतार-चढ़ाव दिखाती हैं। ये कीमती धातुएं निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प हैं, लेकिन इनके दामों के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण काम करते हैं।
वैश्विक आर्थिक कारक
सोने-चांदी के दाम मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसी केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों से प्रभावित होते हैं; कम ब्याज दरें इनकी मांग बढ़ाती हैं जबकि ऊंची दरें दबाव डालती हैं।
मुद्रास्फीति बढ़ने पर ये धातुएं हेज के रूप में चमकती हैं, लेकिन मजबूत डॉलर इनके दाम गिराता है।
भू-राजनीतिक तनाव जैसे युद्ध या व्यापार युद्ध बढ़ोतरी लाते हैं, जबकि शांति की उम्मीदें गिरावट का कारण बनती हैं।
घरेलू बाजार के कारक
भारत में रुपये की कमजोरी सोने-चांदी को महंगा बनाती है, क्योंकि ये डॉलर में आयात होते हैं।
त्योहारों और शादी के मौसम में मांग चढ़ाती है दाम, जबकि आयात शुल्क या जीएसटी जैसे सरकारी कदम प्रभाव डालते हैं।
आरबीआई की हस्तक्षेप से भी उतार-चढ़ाव आता है।
आपूर्ति-मांग का खेल
चांदी की औद्योगिक मांग (सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन) बढ़ रही है, जो 2026 तक कमी पैदा कर सकती है।
खनन उत्पादन कम होने या निर्यात प्रतिबंध (जैसे चीन का) से दाम चढ़ते हैं।
मुनाफावसूली या मार्जिन हाईक जैसे बाजार सुधार गिरावट लाते हैं।
कब होते हैं बड़े उतार-चढ़ाव?
दाम अक्सर जनवरी-अक्टूबर में मजबूत रहते हैं, लेकिन अप्रैल-जून में करेक्शन आता है।
उदाहरण: 2025 के रिकॉर्ड हाई के बाद फेड डेटा और डॉलर मजबूती से फरवरी 2026 में भारी गिरावट।
लंबे समय में स्ट्रक्चरल कमी से चांदी 2.4 लाख/किलो तक पहुंच सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
निवेशक मौसमी रुझानों और वैश्विक खबरों पर नजर रखें।
एसआईपी के जरिए धीरे-धीरे निवेश करें, क्योंकि 2026 में अस्थिरता बनी रह सकती है।